केपी मेमोरियल पब्लिक स्कूल की तरफ से अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन

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अमर बलिदान उनका देश के कण-कण में जिंदा है

जान्हवी ओत सी तुम हो पावन प्रिये में प्रदूषित हूं पर्यावरण की तरह

सारे लोग भूल जाए मां जीवन भर रोती है

रामकोट-सीतापुर। केपी मेमोरियल पब्लिक स्कूल की तरफ से श्री रामेश्वरम धाम प्राचीन मंदिर गंगासागर तीर्थ परिसर पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रुप में प्रदेश कार्यसमिति भाजपा उत्तर प्रदेश सदस्य पूनम मिश्रा रही।


सम्मेलन में लखनऊ से व्याख्या मिश्रा, बाराबंकी से विकास बौखल, लखीमपुर-खीरी से नवल सुधाँशु, रामनगर-बाराबंकी से हरिहरदत्त पाण्डेय, उन्नाव से रामकिशोर वर्मा, बाराबंकी से विनय शुक्ला, सीतापुर से जगजीवन मिश्रा, जालेपारा से अमरेंद्र सिंह चौहान आदि कवियों की वीर रस पर आधारित देश भक्ति की रचनाओं पर सभी दर्शक भाव विभोर हो गए। कवियों ने हास्य-व्यंग्य व राजनीति से जुड़ी रचनाएं प्रस्तुत की। देश के जाने माने ख्यातिप्राप्त कवियों ने अपने काव्य पाठों से उपस्तिथ जन समूह को भाव विभोर कर दिया। कवि सम्मेलन का संचालन भूपेंद्र दीक्षित ने किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके हुआ। श्री रामेश्वरम धाम प्राचीन मंदिर गंगासागर तीर्थ परिसर कवियों की रचनाओं से देश भक्ति के रंगों में रंग गया। इससे पहले विद्यालय प्रबंधक डॉ आरके यादव ने सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह व शाल भेंट कर स्वागत किया।

कवि सम्मेलन में कवि श्रृंखला में कवि जगजीवन मिश्र ने “ये दिल चाहता है नजर में रहो तुम नजर से उतर के जिगर में रहो तुम भले ही मुझे तुम कहीं का ना रखो तमन्ना है यह मेरे घर मेरे घर में रहो तुम” ,”जौ का खेत पुत्र तो बेटी धान की एरिया होती है दो परिवारों की मर्यादा का भार शीर्ष पर धोती है मत पूछो कैसे करती है मां कलेजे का टुकड़ा दूर सारे लोग भूल जाए मां जीवन भर रोती है ” के बोलों से श्रोताओं के मन को झकझोर दिया।


कवि नवल सुधांशु ने “दिलों में आंखों के अंदर रहूंगा नदी के लिए मैं समंदर रहूंगा तुम्हारी नजर में कुछ ना रहूं पर मैं मां की नजर में सिकंदर रहूंगा, न पहले कभी वो शिकायत करेगी पलट कर न वो फिर शरारत करेगी तिरंगे से जो भी मोहब्बत करेगा ये लड़की उसी से मोहब्बत करेगी” ने खूब बाहवाही बटोरी।
अगली कड़ी में कवि विनय शुक्ल ने अपनी कविता “वतन की आबरू जिनकी सदा धड़कन में जिंदा है तिरंगे का सदा सम्मान जिनके मन में जिंदा है जो अपने फर्ज पर इस देश को सब कुछ लुटाये अमर बलिदान उनका देश के कण-कण में जिंदा है ”
इसी श्रृंखला में कवियत्री व्याख्या मिश्रा ने अपने काव्य पाठ मे “भारत के दिलों में बसा जिनका ही नाम है मंदिर है उनका देश पूरा विश्व धाम है इस देश के लिए ही जो बलिदान हो गए ऐसे शहीदों को मेरा शत-शत प्रणाम है”


श्रोताओं में देर से प्रतीक्षित कवि विकास बौखल ने “किसी खंजर से ना तलवार से जोड़ा जाए सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाए ये किसी शख्स को दोबारा ना मिलने पाए प्यार के रोग को आधार से जोड़ा जाए” अपने हास्य और चुटीले व्यंगों से जनमानस को आनंदित कर दिया जिसने सुनाकर पाँडाल के वातावरण को खुशनुमा बनाया।
कवि हरिहरदत्त पाण्डेय ने “मैं हूं भांजा के मानिंद विखरा हुआ तुम मुझे बांध लो व्याकरण की तरह जान्हवी ओत सी तुम हो पावन प्रिये में प्रदूषित हूं पर्यावरण की तरह”
कवि अमरेंद्र सिंह चौहान ने “हाथों में चूड़ियां पैरों में बिछिया मांग में सिंदूर होठों पर लाली लेकर सुहाग की डाली एक सधवा विधवा पेंशन का फार्म भर्ती है कहती है आज आवेदन कर रही हूं जब तक नाम आएगा विधवा हो जाओगी पेंशन का लाभ पा जाऊंगी” इस दौरान कवि सम्मेलन को सुनने के लिए गणमान्य व्यक्ति सहित भारी भीड़  मौजूद रही।

रिपोर्ट- रियासत अली सिद्दीकी