गौरी बाल विद्या मंदिर में वासंती काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

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सीतापुर- सरस्वती माँ के पूजन अर्चन के बाद वासंती काव्य गोष्ठी का हिंदी साहित्य परिषद द्वारा आयोजन गौरी बाल विद्या मंदिर में कराया गया जिसका सञ्चालन अध्यक्ष अवधेश शुक्ल ने करते हुए कहा कि विद्या की देवी सरस्वती सदैव छात्रों के जीवन में नया प्रकाश देती आई है और कवियों को नई भावना वासंती बेला में देती आई हैं| आपने कहा कि “मधुमास आ गया है, मुस्कान ला गया है| है ये वासंती बेला मधुमय सुहा गया है|” गोपाल सागर ने कहा कि “ फूला है बसंत अब फागुन के गीत लिखो, दुश्मन जो रहे बरस भर अब उसे मनमीत लिखो|” मुख्य अतिथि कवि आदर्श मोहन धवन ने कहा कि “ वाणी भगवती शारदा का है दिव्य दिवस, वाणी देवी देखो सबमें ओज भर जाती है|” अध्यक्षता करते हुए राजभाषा अधिकारी विकास विमल ने कहा कि “ जब वे दिन नहीं रहे तो ये दिन भी नहीं रहेंगे, बोया नहीं बबूल तो कांटे कहाँ मिलेंगे|” हास्य कवी रामदास विश ने कहा कि “ रिश्ता और दोस्ती में बहुत बड़ा अंतर है, रिश्ता एक नदी है दोस्ती समुन्दर है|” सम्मानित कवी संद्देप सरस ने कहा कि “ मेरे फूटपाथ से महलों का बिस्तर हार जाता है, बनाकर बांह का तकिया मैं गहरी नींद सोता हूँ|” सभी अतिथियों का स्वागत प्राचार्य किरण शर्मा ने किया और सम्मान सादर संयोजिका अन्नपूर्ण पाल ने कराया|

रिपोर्ट- अलमास अंसारी